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Reviewed in India on 20 January 2019
यह कहानी एक ओर जहां पुरुषवादी सोच को दर्शाती है,वहीं दूसरी ओर नारी के दयावान हृदय की मिसाल पेश करती है।समुदाय का वो तानाबाना जहां पुरूष परिवार के पीछे केवल अपना ही हाथ मानते आये है उस मिथक को इस कहानी ने तोड़ दिया है कि एक परिवार को जोड़ कर रखने मैं औरत की भूमिका कमतर नहीं है।
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4.2 out of 5 stars
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