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Reviewed in India on 27 October 2019
🙏 राम राम, अमीश वो लेखक हैं जिसने मुझे असली मायनो में पढ़ना सिखा दिया, एक गर्व जो मुझमे बचपन से भारतीय सांस्कृतिक एवं उसके वैज्ञानिक सन्दर्भों पर था, उसका एक सूत्र में पिरोया हुआ एवं वैज्ञानिक परिपाटी पर जांचा हुआ कारण उनकी रचनायें देती हैं | यद्यपि कथानक पूरी तरह से स्वरचित है और कुछ मुद्दों पर हमारे पुराणों से भिन्न है तथापि कहानी कहने का अंदाज और घटनाओं को जोड़ने की रोमांचक शैली इस पर भरोसा करने को मजबूर सा करता है | नए पाठक जो भारतीय संस्कृति को सच में जानना चाहते हैं वो कृपया मूल पुस्तकें भी पढ़ लें अन्यथा उन्हें इसी कहानी को सच मन लेने की ग़लतफ़हमी हो सकती है और जल्दी निष्कर्ष पर पहुंचने को उतावली हमारी नई पीढ़ी सच जानने या उसको ढूढ़ने का धैर्य न रखने के चलते मूल जानकारी से विरोधाभासी हो सकती है | अब तो इंतज़ार है त्रिपाठी जी की अगली किताब का | राम राम 🙏
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