Customer Review

Reviewed in India on 16 March 2021
जॉन सबमें हैं, वो फ़िज़ाओं में हैं, लेकिन जब हज़रत जॉन एलिया से आपका तआरुफ इस किताब के जरिये होगा तो यकीन जानिए आप भी जौनियत का शिकार हुए बिना रह नहीं पाएंगे... 'जॉन एलिया: एक अजब-गजब शायर' के सफे पलटने के दौरान आपको ये महसूस होगा कि आप जॉन के घर की दहलीज तक आ पहुंचे हैं और हज़रत जॉन एलिया अंदर बैठे कह रहे हैं 'जो गुज़ारी न जा सकी हमसे हमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है' या फरमा रहे हैं 'यूं जो तकता है आसमान को तू, कोई रहता है आसमान में क्या' या कहते हैं 'किस तरह छोड़ दूं तुम्हें जानां
तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो'....

जॉन को समझने और हमें समृद्ध करने के लिए आपने जो किताब रूपी नायब तोहफा पेश किया है उसके लिए आपका शुक्रिया मुन्तज़िर साब....
2 people found this helpful
Report abuse Permalink

Product Details

4.5 out of 5 stars
4.5 out of 5
262 global ratings