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Reviewed in India on 3 August 2019
बुक्स में इतिहास को तोड़-मरोड़ दिया है , सभी स़सोधन को सिर्फ कल्पना शक्ति से गलत बताया गया है , कोई तार्किक कारण नही है ,नही दिल में उतरता है , जानबूझकर ब्राह्मण की महीमामंडन किया गया है । अश्विन सांधी की रोजाबाल लाइन पुस्तक पढनी चाहिए ,किस तरह से उस बुक में इतिहास का वर्णन किया है ,यहा हड़प्पा में बिल्कुल ऐक व्यकित की कल्पना है जरा भी हकीकत से दुर दूर तक कोई नाता नहीं ,इस लेखक को ट्रायोलोजी ओफ शीवा ,अर्थला ,रोजाबाल लाइन, अफीम सागर जैसी बुक्स पढनी चाहिए
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4.4 out of 5 stars
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