Customer Review

Reviewed in India on 27 December 2018
50 पेज पढ़ चुकने के बाद भावनाएं अपना रास्ता आंसुओ के रूप में खोज लेती है..... महज़ मनोरंजन नही भीतर तक मथ देने वाली कृति....मुझे आश्चर्य है कि इस किताब का अंग्रेजी अनुवाद क्यों नही हुआ??
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4.7 out of 5 stars
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