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Reviewed in India on 22 August 2021
परसाई जी की व्यंग विधा से बिल्कुल अलग सामान्य, समीक्षात्मक और विचारणीय पुस्तक है।

यदि आप व्यंग पढ़ना चाहते हैं तो आप "आवारा भीड़ के खतरे" पुस्तक से निराश होंगे।
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4.4 out of 5 stars
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