Customer Review

Reviewed in India on 8 April 2021
मैं कोई नही होता जॉन साहब की शायरी पर कुछ कहूँ, उनका अंदाज़ - ए - बयान, उनके शब्दों को दिल की गहराई में उतरने में वक़्त नही लगता। और इन शब्दों को हम तक पहुंचाने वाले मुंतज़िर फ़िरोज़ाबाद जी का बहुत शुक्रियादा करना चाहता हूँ।
जिस तरह उन्होंने यह किताब का संकलन किया है वो क़ाबिल - ए - तारीफ़ है। परेशानी यह है कि हमे जॉन साहब के जीवन के बारे में बहुत कम पता है, क्योंकि उस समय के लोगों का इंतक़ाल हो चुका है और जो हैं वो पाकिस्तान में हैं, उनकी जीवनी से शुरू हो यह किताब उनकी कुछ प्रतिनिधि ग़ज़लें, नज़्में, और कुछ कतातों से हमे रूबरू करती है।
किताब समय पर डिलीवर हुई, और एक अच्छी अवस्था में मुझ तक पहुंची। जॉन साहब का एक प्रशंसक होने की हैसियत से मैं हिन्द युग्म और मुंतज़िर भैया को बहुत धन्यवाद कहता हूँ। और सेलर को भी जिन्होंने समय पर अछि अवस्था किताब मुझ तक पहुंचाई।
Regards,
Akshat Nitin Kumar
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